सोमवार, 9 अप्रैल 2012

पाकिस्तान के एक कवि का पैगाम













जो सीमा के इस पार बसे
जो सीमा के उस पार बसे
उन सबके लिये संदेंश मेरा
यह हिन्द और पाक है देश मेरा।

संग्राम समय की यादों से
टूटा हुआ हृदय जोडता हूँ
मैं पुत्र चनाब सरिता का
सूर सागर की लय मोडता हूँ|

मेरा दिल दिल्ली की राहों में
मेरा जॉं लाहौर की बाहों में।
मैं रंग लिखूँ रचनाओं में
मेरा दिया जले दरियाओं में।

स्वराज की रात का वह सपना
गंगा और सिन्ध की यारी है
लो युद्ध का पर्वत राख हुआ
अब प्यार ही प्यार की बारी है|
               -  मसूद मनव्वर


پاکستان کے ایک شاعر کا پیغام
جو سرحد کے اس پار بسے
جو سرحد کے اس پار بسے
ان سب کے لئے سدےش میرا
یہ ہند اور پاک ہے ملک میرا.

جنگ وقت کی یادوں سے
ٹوٹا ہوا دل جوڈتا ہوں
میں بیٹے چناب سرتا کا
سورہ سمندر کی لے موڈتا ہوں |

میرا دل دلی کی راہوں میں
میرا ج لاہور کی باہوں میں.
میں رنگ لکھوں تخلیقات میں
میرا دیا جلے درياو میں.

سوراج کی رات کا وہ خواب
گنگا اور سندھ کی ياري ہے
لو جنگ کا پہاڑ راکھ ہوا
اب پیار ہی پیار کی باری ہے |
                - مسعود منوور

1 टिप्पणी:

  1. शिखा कौशिक ने आपकी पोस्ट " पाकिस्तान के एक कवि का पैगाम " पर एक टिप्पणी छोड़ी है:


    बहुत सुन्दर भावाभिव्यक्ति .आभार

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