आजकल कारपोरेट खेती अपने खूनी पंजें पसार रही है .अनेक देशों कि सरकारें ही कंपनी खेती को बढ़ावा दे रही है .अफ्रीका के कई देशों में खेती योग्य लगभग सारी जमीन ऐसी कंपनियों ने खरीद ली है [ इसमें कई भारतीय भी शामिल हैं ] ऐसे देशों के मूल भूस्वामियों को नाम मात्र की कीमत देकर उन्हें अलग तरह के ग्रामों में बसाया जा रहा है. इसे आधुनिक ग्रामिणीकरण कहा जा रहा है. यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे हमारे यहाँ अधिग्रहीत भूमि के स्वामियों को मुवावजा देकर उनका पुनर्वास किया जाता है. ऐसा पुनर्वास अगर बहुत सही तरीके से भी किया जाए जो की भ्रष्ट व्यवस्था के चलते संभव ही नहीं है, एक पीढ़ी तक ही सुखदायी पाया गया है. बाद वालों के दुर्दिन आने ही आने हैं, आते हैं .ऐसे में समाज में अफरा तफरी और अपराध फैलाना स्वाभाविक है. इससे कोई सरकार कैसे निपटेगी ? इतने सारे लोग जेलों में भी तो कैद नहीं रखें जा सकते हैं. पहले देश निकाले की सजा हुआ करती थी. अक्सर सरकार के लिए सिरदर्द समझे जाने वाले लोगों को निर्जन द्वीपों में सजा के लिए भेजा जाता था, जहाँ वे एक निश्चित अवधी तक सजा भुगतते थे और फिर आजाद कर दिए जाते थे.उन्हें वहीँ बसने के लिए प्रोत्साहित भी किया जाता था और ज्यादातर वहीँ बस भी जाते थे . हमारे यहाँ अंडमान निकोबार जिसे कभी काला पानी कहा जाता था. ऐसी ही जगह थी जो उन सजायाप्ता लोगों के वंशजों से ही आबाद है .अमेरिका भी ऐसे ही देश निकाले के सजायाप्ता लोगों से आबाद हुआ है .बाद में दूसरे लोग भी जाकर बसे हैं लेकिन पहले वहाँ लोगों को जबरदस्ती भेज गया था.
आज दुनिया में ऐसी कोई जगह नहीं बची है जहां सरकार का सिरदर्द बने लोगों को भेजा जा सके .क्या ही अच्छा हो कि सरकारें ऐसे लोगों को अंतरिक्ष के अन्य ग्रहों पर भेजना शुरू कर दे .ऐसे लोगों से सरकार छुटकारा भी पायेगी और सरकार की मंशा के अनुरूप वे सजा भी पायेंगे. मुझे पूरा विश्वाश है कि ऐसे लोग अन्य ग्रहों को भी ऐसा ही चमन बना देंगें जैसा उन्होंने तमाम वीरानों को पहले बनाया है.यह भी तय है कि चमन बनाने के बाद उन्हें वहाँ से भी बेदखल करने के कानूनी उपाय किये जायेगें ताकि संपन्न और ताकतवर लोग वहाँ उनके द्वारा बनाए गए चमन में रह सकें .लेकिन यह जब होगा तब देखा जाएगा .पहले सरकारें ऐसा कुछ करने की सोचें तो सही. अब कुछ न कुछ उपाय सरकार को करना तो पड़ेगा، सम्पान लोगों को गरीबों से बहुत परेशानी जो होती है. वैसे भी जमीन पर गरीब और कमजोर इंसान के लिए जगह बची कहाँ है ?
آج کل کارپوریٹ کھیتی اپنے خونی پجے پسار رہی ہے. کئی ممالک کہ حکومتیں ہی کمپنی کھیتی کو فروغ دے رہی ہے. افریقہ کے کئی ممالک میں کھیتی کے قابل تقریبا ساری زمین ایسی کمپنیوں نے خرید لی ہے [اس میں کئی بھارتی بھی شامل ہیں] ایسے ممالک کے اصل بھوسواميو کو نام صرف کی قیمت دے کر انہیں مختلف طرح کے گرامو میں بسايا جا رہا ہے. اسے جدید گراميكر کہا جا رہا ہے. یہ بالکل ویسا ہی ہے جیسے ہمارے یہاں ادھگرهيت زمین کے مالکان کو مواوجا دے کر ان کی باز آباد کاری کی جاتی ہے. ایسا بازابادکاری اگر بہت صحیح طریقے سے بھی کیا جا سکتا ہے جو کی کرپٹ نظام کی وجہ سے ممکن ہی نہیں ہے، ایک نسل تک ہی سكھدايي پایا گیا ہے. بعد والوں کے دردن آنے ہی آنے ہیں، آتے ہیں. ایسے میں معاشرے میں اپھرا تپھری اور جرم پھیلا نا فطری ہے. اس سے کوئی حکومت کیسے پیش آئی گی؟ اتنے سارے لوگ جیلوں میں بھی تو قید نہیں رکھیں جا سکتے ہیں. پہلے ملک نکالے کی سزا ہوا کرتی تھی. اکثر حکومت کے لئے درد سر سمجھے جانے والے لوگوں کو نرجن جزیروں میں سزا کے لئے بھیجا جاتا تھا، جہاں وہ ایک مقررہ مدت تک سزا بھگتتے تھے اور پھر آزاد کر دیے جاتے تھے. انہیں وہیں بسنے کے لئے حوصلہ افزائی بھی کیا جاتا تھا اور زیادہ تر وہیں بس بھی جاتے تھے. ہمارے یہاں انڈمان نکوبار جسے کبھی کالا پانی کہا جاتا تھا. ایسی ہی جگہ تھی جو ان سجاياپتا لوگوں کے وارثوں سے ہی آباد ہے. امریکہ بھی ایسے ہی ملک نکالے کے سجاياپتا لوگوں سے آباد ہے. بعد میں دوسرے لوگ بھی جا کر بسے ہیں لیکن پہلے وہاں لوگوں کو زبردستی بھیج گیا تھا.
آج دنیا میں ایسی کوئی جگہ نہیں بچی ہے جہاں حکومت کا درد سر بنے لوگوں کو بھیجا جا سکے. کیا ہی اچھا ہو کہ حکومت ایسے لوگوں کو خلا کے دیگر گرهو پر بھیجنا شروع کر دے. ایسے لوگوں سے حکومت نجات بھی پايےگي اور حکومت کی منشا کے مطابق وہ سزا بھی مل جائے گی. مجھے مکمل وشواش ہے کہ ایسے لوگ دیگر گرهو کو بھی ایسا ہی چمن بنا دےگے جیسا انہوں نے تمام ويرانو کو پہلے بنایا ہے. یہ بھی طے ہے کہ چمن بنانے کے بعد انہیں وہاں سے بھی بے دخل کرنے کے قانونی اقدامات کئے جائیں گے تاکہ امیر اور طاقتور لوگ وہاں ان کے ذریعہ بنائے گئے چمن میں رہ سکیں. لیکن یہ جب ہوگا تب دیکھا جائے گا. پہلے حکومتیں ایسا کچھ کرنے کی سوچیں تو سہی. اب کچھ نہ کچھ اقدامات حکومت کو کرنا تو پڑے گا، سمپان لوگوں کو غریبوں سے بہت پریشانی جو ہوتی ہے. ویسے بھی زمین پر غریب اور کمزور انسان کے لئے جگہ بچی کہاں ہے؟
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