बुधवार, 17 अप्रैल 2013

राजा बीमार है क्या ?



        बहुत पुराने समय की बात है किसी देश का राजा बीमार हो गया । दूर दूर के वैध आकर उसे  दवाई देते रहे लेकिन उसकी बीमारी बढती ही जाती थी, कम नहीं होती थी। वैसे तो वैद्यों को उसकी बीमारी ही समझ में नहीं आती थी। सब तरह के परीक्षण किये गये, लेकिन राजा को क्या रोग था यह कोई नहीं जान सका। लेकिन राजा बीमार था. उसे भूख नहीं लगती थी. उसे नींद नहीं आती थी. वह सोते सोते बडबडाता था. चोंककर उठ बैठता था। उसे हर आदमी अपने प्राणों का प्यासा दिखता था। वह सबसे डरता था और सबको डराता था . उसकी ऑंखें लालपीली होती रहती थी.  उसका मन किसी को भी फॉंसी देने को करने लगता था। वह बहुत परेशान था, बहुत हैरान था.  मतलब  कि राजा सचमुच बहुत  बीमार था.अब राजा बीमार था  तो वैद्यों को दवा देनी  ही थी. लेकिन बहुत दिन तक इलाज कराने पर भी जब राजा ठीक नहीं हुआ तो वह  दवा खाते खाते उब गया । उसने कहा कि अब वह सिर्फ उस वैद्य की दवा खायेगा जो उसे स्वस्थ करने की गारन्टी लेगा । अगर दवा ने फायदा नहीं किया तो वह उस वैद्य को सूली पर लटका देगा।
        राजा के वैद्यों ने जब इस घोषणा को सुना तो वे चिन्तित हो उठे । वे अब तक राजा का इलाज करने के नाम पर काफी धन ऐंठ  चुके थे। उन्हें इसकी चिन्ता न थी कि राजा स्वस्थ हो बल्कि वे तो चाहते थे कि राजा अधिक से अधिक दिन बीमार रहे ताकि ओषधी आदि के नाम पर वे राजकोष से धन ऐंठते रहें। लेकिन अब उन्हें ये चिन्ता होने लगी कि राजा चाहे मरें या जियें पर  उनकी जान कभी भी जा सकती हैं.  वे सब इस समस्या पर विचार करने के लिये राजवैध के घर इकटठा हुये। राजवैद्य ने समस्या की गम्भीरता पर विचार करते हुसे कहा कि चिकित्सा की अनेक पद्धतियॉं हैं लेकिन हम जिसे जानते हैं उसे ही सही मानते हैं और उस पर ही अमल करते हैं.  लेकिन आडे वक्त में अन्य पद्धति के जानकारों से भी राय ले लेना चाहिये । उन्होंने कहा कि मेरी जानकारी में सुदूर देश का एक तांत्रिक चिकित्सक है। हमें उससे मशवरा करना चाहिये।
      राजा को उस तान्त्रिक चिकित्सक के विषय में अवगत कराया गया। राजा ने तुरन्त उस तांन्त्रिक चिकित्सक को बुलाने के आदेश दिये। कुछ ही दिन बाद वह तान्त्रिक दरबार में हाजिर हो गया । उसने राजा की बीमारी की जानकारी प्राप्त की और कहा कि राजा ठीक हो जायेगा अगर वह राज हंसों के रक्त से स्नान करे । उससे पूछा गया कि ये राजहॅंस कहॉं मिलेंगें?
 तान्त्रिक ने कहा कि वे राजहॅंस केवल मानसरोवर पर ही पाये जाते हैं।
        राजा को किसी पर विश्वास तो था नहीं, उसने कहा  कि वे स्वयं राजहॅंसों के शिकार के लिये जायेंगे। अगले दिन ही राजा ने अपने साथ अपने चुनींदा जॉंबाज सैनिको की एक टुकडी ली और मानसरोवर के लिये प्रस्थान कर दिया। कई दिन की यात्रा के बाद राजा मानसरोवर के तट पर पहुँच गया। राजा ने देखा झील में राजहॅंस तैर रहे हैं.  राजा ने सैनिको को आदेश दिया कि वे राजहॅंसों को पकड लें । सैनिक झील के किनारे पहुँच गये. लेकिन जैसे ही राजहॅंसों ने उन्हें देखा वे किनारे से दूर चले गये। राजा अपने सैनिको के साथ प्रतीक्षा करता रहा लेकिन राजहॅंस किनारे पर नहीं आये। शाम होने पर राजा अपने शिविर में लौट आया। अगले दिन राजा फिर झील पर गया लेकिन राज हॅंस फिर उन्हें देखकर झील में किनारे से परे चले गये।
        राजा तीसरे दिन फिर झील पर गया। राजहॅंस उन्हें देखते ही फिर झील के अन्दर चले गये । राजा झल्ला गया। उसने सैनिको को आदेश दिया कि वे अपने तीरों से राजहॅंसों को मार डालें। सैनिको ने अपने धनुषों की प्रत्यंचा चढानी शुरू कर दी। महामंत्री ने यह देखकर कहा राजन सैनिको को रोकिये। अगर उन्होने राजहॅंसों को मार भी दिया तो झील में घुसकर कोई निकाल नहीं पायेगा. क्योंकि झील  का पानी इतना डंडा है कि जो भी उसके अन्दर जायेगा वो ठंड के कारण वहीं जमकर मर जायेगा।
           राजा सोच में पड गया। उसने शिविर में वापिस लौटने का हुक्म दिया। रात्रि का पुनः मन्त्रणा की गई। राजपुरोहित ने समस्या के हल के लिये एक उपाय बताया। अगले दिल राजा अपने चार सैनिको के साथ झील के तट पर पहुँचा। राजहॅंस झील में तैर रहे थे। राजा और उसके सैनिकों ने झटपट एक एक राजहॅंस को पकडा और उसकी गर्दन मरोडकर अपने बाजू में दबाकर लौट आये।  सवाल ये है कि उस दिन राज हॅंस झील के अन्दर क्यूँ नहीं गये ? कारण सिर्फ ये था कि उस दिन राजा और उसके सैनिक राज पुरोहित की सलाह के अनुसार साधुओं के वेश में गये थे. साधु सन्यासियों से राजहॅंस भय नहीं खाते थे उन्हें मालूम था ये बडे भले लोग होते हैं। वे उनकी हथेली पर अपनी चोंच से दाना चुग सकते थे। साधू उनकी पीठ सहला सकते थे उन्हें कोई भय न था .साधु वेशधारी राजा और सैनिको ने उनके इसी भोलेपन के कारण उन्हें धोखे से पकड लिया और मार डाला।
  सुना है राजा और हंसों में फिर से प्रेमभाव बढ रहा है . राजा बीमार है क्या ?

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