मंगलवार, 8 मार्च 2016

मेरी इस बदजुबानी पे न कोई फैसला करना


मुझे मालूम है मेरा जहाँ भी आना जाना है
निगहबानी मेरी करता वहाँ सारा ज़माना है.

मेरी इस बदजुबानी पे न कोई फैसला करना
सियासी लोग घेरे हैं, इरादा वहशियाना है .

मैं गाना चाहता हूँ गीत दुनिया में मौहब्बत के
वे नफ़रत ले के आ बैठे, कहाँ मेरा ठिकाना है .

कहा मैंने मौहब्बत के तराने क्यूँ नहीं गाते ?
उठा के मारते पत्थर मेरे सिर पे निशाना है.

ना नीचा हाथ वो करते,कदम पीछे ना मैं रखता
उन्हें भी आजमाने दो, मुझे भी आजमाना है .

मेरे घर को जलाना शौक से इसका न गम मुझको
मुझे ये फ़िक्र उसकी जद में तेरा आशियाना है .

मुनाफे और घाटे का बही खाता न मैं रखता
परे रख तू तिजारत को, यहाँ सब सूफियाना है .

अरे औ आसमां तू रोक ले ये बर्क औ बारिश
मेरी बेटी की शादी है, टपकता शामियाना है .

मेरी बस्ती में जाकर पूछ लेना तुम किसी से भी 
बता देगा उधर रहता वो पागल औ दीवाना है .

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