
'अगेंजो भारत छोडो' गॉंधीजी ने आवाज लगायी, सारा भारत एक आवाज में बोल उठा-'अग्रेंजो भारत छोडो'। अग्रेंजों ने भारत छोड दिया, वापिस चले गये अपने देश इंग्लैण्ड।हमारा देश 200 सौ साल की गुलामी से आजाद हो गया।लाल किले पर तिरंगा क्या लहराया लोग उल्लासित हो कर गाने लगे ' जन गन मन अधिनायक जय हो...... लेकिन कुछ लौग चिल्लाने लगे 'हमें पूरी आजादी चाहिये,हम हजार साल से गुलाम थे' हमें पूरी आजादी चाहिये।
लोग सकपकाये एक हजार साल की गुलामी? किसकी गुलामी?
जबाब मिला -'२०० साल अंगेजों की और ८०० साल मुसलमानों की गुलामी। मुसलमान भी बाहर से आये हैं इन्हें भी बाहर निकालो ये देश हिन्दुओं का है।'
मुसलमान बोले 'हम क्यों बाहर जायें? हम भी यहीं के हैं और ये देश हमारा भी है।'
सब लोग कहने लगे 'हॉं ये ठीक कहते हैं। ये देश सबका है।'
कुछ लोग फिर चिल्लाये 'नहीं इनका नहीं हैं। इन्होंने देश का बॅटवारा कर लिया है| अब ये अपने हिस्से में जाकर रहें| हम अपने हिस्से में आर्य हिन्दु राष्ट्र बनाकर रहेंगे।'
मुसलमान बोले 'हमने नहीं किया देश का बॅटवारा, जिन्होंने किया होगा वो चले गये। हम तो सदियों से यहीं रहते आये हैं और यहीं जियेंगें यहीं मरेंगें।'
सब लोग बोले 'हॉं तुम यहीं रहोगे, जैसे हम रहते हैं। यह देश हमारा सबका है।'
काली टोपीधारी नेकर वालों ने हवा में लाठी घुमायी और चिल्लाये -'कौन बोला ये देश सबका है? ये देश हम हिन्दुओं का है, हम आर्यों का है। हमने यहॉं महाभारत किया। हमने यहीं से राम के साथ जाकर लंका पर चढायी की। हमने यहीं अश्वमेध यज्ञ किये। मोहनजादडों की खुदाई से साबित होता है कि हमने हजारों साल पहले यहॉं सभ्यता और संस्कृति का निर्माण किया।'
यह तमाशा देख सुन रहा श्याम पुरूष सिन्धु घाटी की सभ्यता का नाम सुनते ही बोल उठा -'ओ आर्य पुत्तर बाहर निकल| मोहनजोदड़ों का निर्माण तुमने नहीं हमने किया है| तुम तो खानाबदोश चरवाहे थे| यहाँ से वहाँ मारे- मारे फिरते थे |हमारे देश को हरा भरा देखकर यहाँ घुस आये और हमारे दुर्गों पुरों को हथिया लिया| फिर उन्हें अपना बताने लगे| यह देश हमारा है। हम द्रविडो,शबरों,कोल किरातों,भीलों,नागाओं,निषादों का है।हम मूल निवासी हैं। जिन्हें तुमने दुर्गम वनों, पहाडों, रेगिस्तानी बियाबानों में धकेल दिया।
हमें तुमने अपने ग्रन्थों में असुर,राक्षस,दैत्य,दनुज,दानव आदि के नाम से अपरूप् किया है। वो हम ही थे और ये देश हमारा है।अब जब तुम घुसपैठियों ने पूरे देश को कब्ज़ा लिया है और हमें पहाडों, वनों से भी बेदखल करना शुरू कर दिया है तो हमारे सामने इसके अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है कि हम तुम्हें यह बता दें कि मूल निवासी जाग गये हैं और अपनी जल, जंगल, जमीन को बचाने के लिये भयंकर जंग लड़ेंगें।'
काली टोपी वाला नेकरधारी कुनमुनाया-' नहीं ये नहीं हो सकता| तुम्हें किसी ने बरगला दिया है। हम तुम तो एक हैं। ये दाडीवाले बाहर से आये हैं।'
श्याम पुरूष चिल्लाया 'हॉं हम भी तो यही कह रहें हैं तुम्हारे दाडी वाले गुरू गोलाभर के जटाजूटधारी पूर्वज मध्य एशिया से यहॉं भागकर आये थे। हम यहॉं आराम से रह रहे थे, तुमने सब तहस -नहस कर डाला और इस देश के मालिक बन बैठे। पर अब ये अन्याय नहीं सहेंगें। अब हम संगठित हो रहे हैं और तुम्हें तुम्हारी औकात बताकर रहेंगें।'
टोपीधारी ने ऑंखें तरेरी -'तुम्हें हमारी ये तेल पिलायी हुई लाठी नहीं दिखायी देत।हमने सिकंदर की फौजों को हराया, हमने तक्षसिला जैसा विश्वविद्यालय हमने तक्षसिला जैसा विश्वविद्यालय हमने तक्षसिला जैसा विश्वविद्यालय बचाया | तुम जंगली आदमी हम तुम्हें बतायें हमने कैसे यह देश बसाया?
श्याम पुरूष मुस्कराया- 'हॉं ठीक कहते हो, पर तब भी पूर्वोत्तर और दक्षिण में हम ही थे। हम तुम्हारे मगध या दिल्ली से शासित नहीं थे| वो तो बहुत बाद में सम्राट अशोक ने उत्तर दक्षिण को एक कर इस देश का यह नक्शा बनाया। तुम तक्षसिला की बात करते हो? चलो तुम्हें वहीं भेज देते हैं।'
काली टोपी वाला ढीले होते नेकर की बेल्ट कसते हुए बोला -'नहीं वहॉं तो ये रहेगें चॉंद तारे वाले। वहॉं अब वहाँ हमारा चॉंद सूरज तो क्या दिखता, दिया भी नहीं टिमटिमाता| हमारा अखण्ड भारत तो कश्मीर से कन्या कुमारी और गोहाटी से चोपाटी तक है। सुनो सुनो क्या बढ़िया कविता लिखी है तुमभी सुनो केरल से कारगिल घाटी तक गोहाटी से चौपाटी तक सारा देश हमारा ,जीना है तो मरना सीखो गूंज उठे ये नारा।'
'हाँ तभी तो दुश्मन कारगिल पर कब्ज़ा कर के बैठ गया था' श्याम पुरूष ने तंज करते हुये पूछा -'ये तो बताओ गोहाटी से आगे जो मनीपुर,मिजोरम,नागालैण्ड, त्रिपुरा और अरूणाचल है उसका क्या होगा? ? कुछ पता है ये कब से तुम्हारे नक्शे में हैं? अग्रेंजो ने फौज के बल पर कब्जा कर भारत में शामिल कर दिये| आज वो भारत में पूरी निष्ठा से शामिल हैं| उसके लिये कुछ अग्रेंजो के शुक्रगुजार हो या वो भी पहले से ही तुम्हारे आर्य भारत के नक्शे में थे?'
अब मूल निवासियों के सवालों का क्या जबाब हो? यही ना कि हम आर्य हिन्दु बाहर से नहीं आये यहीं के निवासी हैं। लेकिन आप और वो भी जो खुद को मूल निवासी कहते हैं कभी न कभी तो बाहर से यहॉं आयें होंगें| आदमी सब जगह पैदा नहीं हुआ, किसी एक जगह ही पैदा हुआ होगा और फिर धीरे धीरे सारी धरती पर फैल गया होगा। फैलने की यह प्रक्रिया लगातार चलती रही है। काफिले आगे बढते जाते हैं। पडाव पर कुछ नये लौग मिलते हैं कुछ वहीं छूट जाते हैं। आगे बढ़ने वालों को कुछ पीढ़ियों तक याद रहता है कि हम बाहर से आये।फिर जो जहॉं जन्म लेता है उसी को अपना देश मानता है। वैसे भी समय- समय पर देश का नाम और नक्शे बदलते रहते हैं। इसीलिये बहुत से लौग देश की अपेक्षा नस्ल और धर्म के प्रति ज्यादा अपनत्व रखते हैं क्योंकि वह ज्यादा स्थायी होते हैं और देश बदलने पर भी उनके बदलने की आवश्यकता प्राय: नहीं पडती।शायद इसीलिये कभी कभी अपने धर्म और नस्ल के प्रति लोग इतने अहंकारी हो जाते हैं कि दूसरे को हीन मानने लगते हैं और द्वेष रखने लगते हैं। इसकी आड में स्वार्थी लोगों को अपना स्वार्थ पूरा करने में भी आसानी होती है।
आधुनिक युग में नस्ल और धर्म के प्रति दुराग्रह को खारिज कर देशभक्ति को क्या सबसे उपर घोषित किया गया लोग देश पर ही काबिज होने में लग गये और अपने को देशभक्त साबित करने के लिये दूसरे को बाहरी और स्वयं को मूल निवासी बताया जाने लगा। इस दुष्प्रचार में ये भी नहीं देखते कि जब से वे अपने को यहॉं का रहने वाला बता रहे हैं तब से इसका नाम और नक्शा यही है या कुछ ओर था? वैश्वीकरण के इस युग में जब पूॅजीपति किसी देश के प्रति वफादार नहीं हैं उन्हें जहॉं मुनाफा दिखायी देता है वहॉं अपनी पूॅजी ले जाते हैं, जहॉं सहूलियत मिले वहॉं बस जाते हैं। अच्छे वैज्ञानिक, तकनीशियन जहॉं चाहें जा सकते हैं। फिर ये मूल निवासी का क्या झगडा है? मजदूर का मजदूर से? या मुनाफाखोरों का अपने मुनाफे के बाजार सुरक्षित बनाये रखने का? या धर्म के धन्धेबाजों का अपने भक्तों को भेड बनाये रखने का? या भ्रष्ट नेताओं का देश को सुरक्षित चरागाह बनाये रखने का?
निश्चय ही मेहनत कश इन्सान के अलावा यह बाकि सबका झगडा है जिसे देशभक्ति का रंग दिया जाता है। मेहनतकशों का तो यह सारा संसार है और वे एक खेत नहीं एक देश नहीं वो सारी दुनिया मॉंगेंगे।
کیسا ملک؟ کیسے دیشواسی؟
'اگےجو بھارت چھوڑو' گدھيجي نے آواز لگائی، سارا بھارت ایک آواز میں بول اٹھا - 'اگرےجو بھارت چھوڑو'. اگرےجو نے بھارت چھوڑ دیا. واپس چلے گئے اپنے انگلینڈ. ملک 200 سو سال کی غلامی سے آزاد ہو گیا. لیکن کچھ لوگ چلانے لگے نہیں 'ہم ہزار سال سے غلام تھے' ہمیں پوری آزادی چاہیے. لوگ سكپكايے ایک ہزار سال کی غلامی؟ کس کی غلامی؟ جواب ملا 200 سال اگےجو کی اور 800 سال مسلمانوں کی غلامی. مسلمان بھی باہر سے آئے ہیں انہیں بھی باہر نکالو یہ ملک ہندوؤں کا ہے.
مسلمان بولے 'ہم کیوں باہر جائیں؟ ہم بھی یہیں کے هےور یہ ملک ہمارا بھی ہے. سب لوگ کہنے لگے 'ہاں یہ ٹھیک کہتے ہیں. یہ ملک سب کا ہے. کچھ لوگ پھر چللايے نہیں ان نہیں ہیں. انہوں نے ملک کا بٹوارا کر لیا ہے | اب یہ اپنے حصے میں جا کر رہیں | ہم اپنے حصے میں اري ہندو قوم بنا کر رہیں گے. مسلمان بولے 'ہم نے نہیں کیا ملک کا بٹوارا، جنہوں نے کیا ہوگا وہ چلے گئے. ہم تو صدیوں سے یہیں رہتے آئے ہیں اور یہیں جيےگے یہیں مرےگے. ' سب لوگ بولے 'ہاں تم یہیں رہو گے، جیسے ہم رہتے ہیں. یہ ملک ہمارا سب کا ہے. 'کالی ٹوپيدھاري نےكر والوں نے ہوا میں لاٹھی گھمايي اور چللايے -' کون بولا یہ ملک سب کا ہے؟ یہ ملک ہم ہندوؤں کا ہے ہم اريو کا ہے. ہم نے یہاں مہابھارت کیا. ہم نے یہیں سے رام کے ساتھ جا کر لنکا پر چڈھايي کی. ہم نے یہیں اشومےدھ یجن کئے. موهنجادڈو کی کھدائی سے ثابت ہوتا ہے کہ ہم نے ہزاروں سال پہلے یہاں تہذیب اور ثقافت کا تعمیر کیا.یہ تماشہ دیکھ سن رہا شیام مرد سندھ وادی کی تہذیب کا نام آتے ہی بول اٹھا - 'و اري پتر باہر نکل | یہ ملک ہمارا ہے. ہم دروڈو، شبرو، کول كراتو، بھيلو، ناگاو کا ہے. ہم اصل باشندے ہیں. جنہیں تم نے درگم جنگلوں، پهاڈو، ریگستانی بيابانو میں دھکیل دیا. جنہیں تم نے اپنے گرنتھوں میں اسر، دانو، دےتي، دنج، جنات وغیرہ کے نام سے اپروپ کیا ہے. وہ ہم ہی تھے اور یہ ملک ہمارا ہے. اب جب تم دراندازوں نے پورے ملک کو قبضہ لیا ہے اور ہمیں پهاڈو جنگلوں سے بھی بے دخل کرنا شروع کر دیا ہے تو ہمارے سامنے اس کے علاوہ کوئی راستہ نہیں بچا ہے کہ ہم تمہیں یہ بتا دیں کہ اصل باشندے جاگ گئے ہیں اور اپنی پانی، جنگل، زمین کو بچانے کے لئے ہتھیار اٹھا رہے ہیں.
کالی ٹوپی والا نےكردھاري كنمنايا نہیں یہ نہیں ہو سکتا | تمہیں کسی نے برگلا دیا ہے. ہم تم تو ایک ہیں. یہ داڈيوالے باہر سے آئے ہیں. شیام مرد چلایا 'ہاں ہم بھی تو یہی کہہ رہے ہیں. تمہارے داڈي والے استاد گولابھر کے جٹاجوٹدھاري پوروج وسطی ایشیا سے یہاں بھاگ کر آئے تھے. ہم یہاں آرام سے رہ رہے تھے، تم نے سب تہس - نہس کر ڈالا اور اس ملک کے مالک بن بیٹھے. پر اب یہ نا انصافی نہیں سهےگے. اب ہم منظم ہو رہے ہیں اور تمہیں تمہاری اوقات بتا کر رهےگے.
ٹوپيدھاري نے آنکھیں ترےري تمہیں ہماری یہ تیل پلايي ہوئی لاٹھی نہیں دکھائی دیتی. تم جنگلی آدمی ہم بتائیں ہم نے کس طرح یہ ملک بسايا. ہم نے تكشسلا جیسا یونیورسٹی بنایا.
'ہاں ٹھیک کہتے ہو، پر تب بھی شمال مشرقی اور جنوبی میں ہم ہی تھے. ہم تمہارے مگدھ یا دہلی سے حکمرانی نہیں تھے | وہ تو بہت بعد میں بادشاہ اشوک نے جواب جنوبی کو ایک کر اس ملک کا یہ نقشہ بنایا. تم تكشسلا کی بات کرتے ہو چلو تمہیں وہیں بھیج دیتے ہیں. ''نہیں وہاں تو یہ رهےگے چد تارے والے. وہاں اب وہاں ہمارا چد سورج تو کیا دیا بھی نہیں جلتا | ہمارا اكھڈ بھارت تو کشمیر سے کنیا كماري اور گوهاٹي سے چوپاٹي تک ہے.اور گوهاٹي سے آگے جو منيپر، میزورم، ناگالےڈ، تری پورہ اور اروناچل ہے اس کا کیا ہوگا؟ کچھ پتہ ہے یہ کب سے تمہارے نقشے میں ہیں. اگرےجو نے جو فوج کے بل پر قبضہ کر بھارت میں شامل کئے، وہ اس اكھڈ بھارت میں پوری وفاداری سے شامل ہیں | اس لئے کچھ اگرےجو کے شكرگجار ہو یا وہ بھی پہلے سے ہی تمہارے اري بھارت کے نقشے میں تھے.
اب اصل باشندوں کے سوالات کا کیا جواب ہو؟ یہی نا کہ ہم اري ہندو باہر سے نہیں آئے یہیں کے رہنے والے ہیں. لیکن آپ اور وہ بھی جو خود کو اصل باشندے کہتے ہیں وہ کبھی نہ کبھی تو باہر سے یہاں آئیں ہوں گے | آدمی سب جگہ پیدا نہیں ہوا، وہ کسی ایک جگہ ہی پیدا ہوا ہوگا اور پھر دھیرے دھیرے ساری زمین پر پھیل گیا ہوگا. پھیلنے کی یہ عمل مسلسل چلتی رہی ہے. قافلے آگے بڈھتے جاتے ہیں. پڈاو پر کچھ نئے لوگ ملتے ہیں کچھ وہیں چھوٹ جاتے ہیں. آگے بڑھنے والوں کو کچھ نسلوں تک یاد رہتا ہے کہ ہم باہر سے آئے. جو جہاں جنم لیتا ہے اسی کو اپنا ملک مانتا ہے. ویسے بھی وقت وقت پر ملک کا نام اور نقشے بدلتے رہتے ہیں. اسيليے بہت سے لوگ ملک کی توقع نسل اور مذہب کے فی مزید اپنتو رکھتے ہیں کیونکہ وہ مزید مستقل ہوتے ہیں اور ملک تبدیل کرنے پر بھی ان کو تبدیل کرنے کی ضرورت عام طور پر نہیں پڑتی.، یہاں تک کی کبھی کبھی اپنے مذہب اور نسل کے فی لوگ اتنے مغرور جاتے ہیں کہ دوسرے کو احساس ماننے لگتے ہیں اور دوےش رکھنے لگتے ہیں. اس کی اڈ میں خود غرض لوگوں کو اپنا مفاد پورا کرنے میں بھی آسانی ہوتی ہے. جدید دور میں نسل اور مذہب کے فی ارادہ کو مسترد کر حب الوطنی کو سب سے اوپر کا اعلان کیا گیا. بسے لوگ ملک پر قابض ہونے میں لگ گئے اور اپنے کو دےشبھكت ثابت کرنے کے لئے دوسرے کو بیرونی اور خود کو اصل باشندے ہونے بتایا جانے لگا. اس دشپرچار میں یہ بھی نہیں دیکھتے کہ جب سے وہ اپنے کو یہاں کا رہنے والا بتا رہے ہیں تب سے اس کا نام اور نقشہ یہی ہے یا کچھ اور تھا؟ گلوبلائزیشن کے اس دور میں جب پوجيپت کسی ملک کے فی وفادار نہیں ہیں انہیں جہاں منافع ظاہر ہے وہاں اپنی پوجي لے جاتے ہیں، جہاں سہولت ملے وہاں بس جاتے ہیں. اچھے سائنسدان، تکنیکی ماہرین جہاں چاہیں جا سکتے ہیں. پھر یہ اصل باشندے کا کیا جھگڈا ہے؟ مزدور کا مزدور سے؟ یا منافع خوروں کا اپنے مناپھے کے بازار محفوظ برقرار رکھنے کا؟مذہب کے دھندھےباجو کا اپنے بھکتوں کو بھےڈ برقرار رکھنے کا؟ یا بدعنوان لیڈروں کا ملک کو محفوظ چراگاه برقرار رکھنے کا؟
یقینا محنت کش انسان کے علاوہ باقی سب کا یہ جھگڈا ہے جسے حب الوطنی کا رنگ دیا جاتا ہے. میہنتکشوں کا تو یہ ساری دنیا ہے اور وہ ایک کھیت نہیں ایک ملک نہیں وہ سارا زمانہ مگےگے.
'اگےجو بھارت چھوڑو' گدھيجي نے آواز لگائی، سارا بھارت ایک آواز میں بول اٹھا - 'اگرےجو بھارت چھوڑو'. اگرےجو نے بھارت چھوڑ دیا. واپس چلے گئے اپنے انگلینڈ. ملک 200 سو سال کی غلامی سے آزاد ہو گیا. لیکن کچھ لوگ چلانے لگے نہیں 'ہم ہزار سال سے غلام تھے' ہمیں پوری آزادی چاہیے. لوگ سكپكايے ایک ہزار سال کی غلامی؟ کس کی غلامی؟ جواب ملا 200 سال اگےجو کی اور 800 سال مسلمانوں کی غلامی. مسلمان بھی باہر سے آئے ہیں انہیں بھی باہر نکالو یہ ملک ہندوؤں کا ہے.
مسلمان بولے 'ہم کیوں باہر جائیں؟ ہم بھی یہیں کے هےور یہ ملک ہمارا بھی ہے. سب لوگ کہنے لگے 'ہاں یہ ٹھیک کہتے ہیں. یہ ملک سب کا ہے. کچھ لوگ پھر چللايے نہیں ان نہیں ہیں. انہوں نے ملک کا بٹوارا کر لیا ہے | اب یہ اپنے حصے میں جا کر رہیں | ہم اپنے حصے میں اري ہندو قوم بنا کر رہیں گے. مسلمان بولے 'ہم نے نہیں کیا ملک کا بٹوارا، جنہوں نے کیا ہوگا وہ چلے گئے. ہم تو صدیوں سے یہیں رہتے آئے ہیں اور یہیں جيےگے یہیں مرےگے. ' سب لوگ بولے 'ہاں تم یہیں رہو گے، جیسے ہم رہتے ہیں. یہ ملک ہمارا سب کا ہے. 'کالی ٹوپيدھاري نےكر والوں نے ہوا میں لاٹھی گھمايي اور چللايے -' کون بولا یہ ملک سب کا ہے؟ یہ ملک ہم ہندوؤں کا ہے ہم اريو کا ہے. ہم نے یہاں مہابھارت کیا. ہم نے یہیں سے رام کے ساتھ جا کر لنکا پر چڈھايي کی. ہم نے یہیں اشومےدھ یجن کئے. موهنجادڈو کی کھدائی سے ثابت ہوتا ہے کہ ہم نے ہزاروں سال پہلے یہاں تہذیب اور ثقافت کا تعمیر کیا.یہ تماشہ دیکھ سن رہا شیام مرد سندھ وادی کی تہذیب کا نام آتے ہی بول اٹھا - 'و اري پتر باہر نکل | یہ ملک ہمارا ہے. ہم دروڈو، شبرو، کول كراتو، بھيلو، ناگاو کا ہے. ہم اصل باشندے ہیں. جنہیں تم نے درگم جنگلوں، پهاڈو، ریگستانی بيابانو میں دھکیل دیا. جنہیں تم نے اپنے گرنتھوں میں اسر، دانو، دےتي، دنج، جنات وغیرہ کے نام سے اپروپ کیا ہے. وہ ہم ہی تھے اور یہ ملک ہمارا ہے. اب جب تم دراندازوں نے پورے ملک کو قبضہ لیا ہے اور ہمیں پهاڈو جنگلوں سے بھی بے دخل کرنا شروع کر دیا ہے تو ہمارے سامنے اس کے علاوہ کوئی راستہ نہیں بچا ہے کہ ہم تمہیں یہ بتا دیں کہ اصل باشندے جاگ گئے ہیں اور اپنی پانی، جنگل، زمین کو بچانے کے لئے ہتھیار اٹھا رہے ہیں.
کالی ٹوپی والا نےكردھاري كنمنايا نہیں یہ نہیں ہو سکتا | تمہیں کسی نے برگلا دیا ہے. ہم تم تو ایک ہیں. یہ داڈيوالے باہر سے آئے ہیں. شیام مرد چلایا 'ہاں ہم بھی تو یہی کہہ رہے ہیں. تمہارے داڈي والے استاد گولابھر کے جٹاجوٹدھاري پوروج وسطی ایشیا سے یہاں بھاگ کر آئے تھے. ہم یہاں آرام سے رہ رہے تھے، تم نے سب تہس - نہس کر ڈالا اور اس ملک کے مالک بن بیٹھے. پر اب یہ نا انصافی نہیں سهےگے. اب ہم منظم ہو رہے ہیں اور تمہیں تمہاری اوقات بتا کر رهےگے.
ٹوپيدھاري نے آنکھیں ترےري تمہیں ہماری یہ تیل پلايي ہوئی لاٹھی نہیں دکھائی دیتی. تم جنگلی آدمی ہم بتائیں ہم نے کس طرح یہ ملک بسايا. ہم نے تكشسلا جیسا یونیورسٹی بنایا.
'ہاں ٹھیک کہتے ہو، پر تب بھی شمال مشرقی اور جنوبی میں ہم ہی تھے. ہم تمہارے مگدھ یا دہلی سے حکمرانی نہیں تھے | وہ تو بہت بعد میں بادشاہ اشوک نے جواب جنوبی کو ایک کر اس ملک کا یہ نقشہ بنایا. تم تكشسلا کی بات کرتے ہو چلو تمہیں وہیں بھیج دیتے ہیں. ''نہیں وہاں تو یہ رهےگے چد تارے والے. وہاں اب وہاں ہمارا چد سورج تو کیا دیا بھی نہیں جلتا | ہمارا اكھڈ بھارت تو کشمیر سے کنیا كماري اور گوهاٹي سے چوپاٹي تک ہے.اور گوهاٹي سے آگے جو منيپر، میزورم، ناگالےڈ، تری پورہ اور اروناچل ہے اس کا کیا ہوگا؟ کچھ پتہ ہے یہ کب سے تمہارے نقشے میں ہیں. اگرےجو نے جو فوج کے بل پر قبضہ کر بھارت میں شامل کئے، وہ اس اكھڈ بھارت میں پوری وفاداری سے شامل ہیں | اس لئے کچھ اگرےجو کے شكرگجار ہو یا وہ بھی پہلے سے ہی تمہارے اري بھارت کے نقشے میں تھے.
اب اصل باشندوں کے سوالات کا کیا جواب ہو؟ یہی نا کہ ہم اري ہندو باہر سے نہیں آئے یہیں کے رہنے والے ہیں. لیکن آپ اور وہ بھی جو خود کو اصل باشندے کہتے ہیں وہ کبھی نہ کبھی تو باہر سے یہاں آئیں ہوں گے | آدمی سب جگہ پیدا نہیں ہوا، وہ کسی ایک جگہ ہی پیدا ہوا ہوگا اور پھر دھیرے دھیرے ساری زمین پر پھیل گیا ہوگا. پھیلنے کی یہ عمل مسلسل چلتی رہی ہے. قافلے آگے بڈھتے جاتے ہیں. پڈاو پر کچھ نئے لوگ ملتے ہیں کچھ وہیں چھوٹ جاتے ہیں. آگے بڑھنے والوں کو کچھ نسلوں تک یاد رہتا ہے کہ ہم باہر سے آئے. جو جہاں جنم لیتا ہے اسی کو اپنا ملک مانتا ہے. ویسے بھی وقت وقت پر ملک کا نام اور نقشے بدلتے رہتے ہیں. اسيليے بہت سے لوگ ملک کی توقع نسل اور مذہب کے فی مزید اپنتو رکھتے ہیں کیونکہ وہ مزید مستقل ہوتے ہیں اور ملک تبدیل کرنے پر بھی ان کو تبدیل کرنے کی ضرورت عام طور پر نہیں پڑتی.، یہاں تک کی کبھی کبھی اپنے مذہب اور نسل کے فی لوگ اتنے مغرور جاتے ہیں کہ دوسرے کو احساس ماننے لگتے ہیں اور دوےش رکھنے لگتے ہیں. اس کی اڈ میں خود غرض لوگوں کو اپنا مفاد پورا کرنے میں بھی آسانی ہوتی ہے. جدید دور میں نسل اور مذہب کے فی ارادہ کو مسترد کر حب الوطنی کو سب سے اوپر کا اعلان کیا گیا. بسے لوگ ملک پر قابض ہونے میں لگ گئے اور اپنے کو دےشبھكت ثابت کرنے کے لئے دوسرے کو بیرونی اور خود کو اصل باشندے ہونے بتایا جانے لگا. اس دشپرچار میں یہ بھی نہیں دیکھتے کہ جب سے وہ اپنے کو یہاں کا رہنے والا بتا رہے ہیں تب سے اس کا نام اور نقشہ یہی ہے یا کچھ اور تھا؟ گلوبلائزیشن کے اس دور میں جب پوجيپت کسی ملک کے فی وفادار نہیں ہیں انہیں جہاں منافع ظاہر ہے وہاں اپنی پوجي لے جاتے ہیں، جہاں سہولت ملے وہاں بس جاتے ہیں. اچھے سائنسدان، تکنیکی ماہرین جہاں چاہیں جا سکتے ہیں. پھر یہ اصل باشندے کا کیا جھگڈا ہے؟ مزدور کا مزدور سے؟ یا منافع خوروں کا اپنے مناپھے کے بازار محفوظ برقرار رکھنے کا؟مذہب کے دھندھےباجو کا اپنے بھکتوں کو بھےڈ برقرار رکھنے کا؟ یا بدعنوان لیڈروں کا ملک کو محفوظ چراگاه برقرار رکھنے کا؟
یقینا محنت کش انسان کے علاوہ باقی سب کا یہ جھگڈا ہے جسے حب الوطنی کا رنگ دیا جاتا ہے. میہنتکشوں کا تو یہ ساری دنیا ہے اور وہ ایک کھیت نہیں ایک ملک نہیں وہ سارا زمانہ مگےگے.
1-अरविंद विद्रोही निश्चय ही मेहनत कश इन्सान के अलावा बाकि सबका यह झगडा है जिसे देशभक्ति का रंग दिया जाता है। मेहनतकशों का तो यह सारा संसार है और वे एक खेत नहीं एक देश नहीं वो सारा जमाना मॉंगेंगे।
जवाब देंहटाएं47 minutes ago · Unlike · 1
2-विनोद हौसलेवाला सबकी अपनी-अपनी ढपली और अपना-अपना राग चल रहा है......कोई कहता हो कि देश के लोगों की चिंता है तो ये बात बेमानी है.
40 minutes ago · Unlike · 1
3-अमरनाथ 'मधुर' - अरविन्द भाई आपने पसंद किया इसके लिए आपका शुक्रिया |एक बार को तो लगा था कि मूल निवासी जान बूझकर मेरी इस पोस्ट को अपने मोर्चे से बाहर कर रहें हैं |इस प्रकार के मोर्चे में रहने से पहले एक बार फिर सोचना पड़ेगा |
40 minutes ago · Like · 1
4-विनोद हौसलेवाला -- मूलनिवासी..........हाहाह्हहहाहहहहह्ह्हा
37 minutes ago · Unlike · 1
5-गिरिजेश तिवारी - विश्लेषण देश, राष्ट्र और राज्य के अंतर् को समझने में सहायक होगा. इन शब्दों के अर्थ भी स्पष्ट करें तो बेहतर होगा. शैली सुन्दर और प्रभावशाली है.
6-राज सिंह पधान - मधुर जी नमस्कार , आप ने बहुत अच्छी बात कही हें लेकिन में फिर वही कहुगा के क्या घर पर बैठ कर अफ़सोस जताने से दुनिया की हालत सुधरेगी? नही लेकिन आप के और हमारे कुछ प्रयासों से सायद नोजवानो में कुछ बदलाव आ जाये आप साथ दीजिये देश जरुर बदलेगा
Monday at 9:10pm · Unlike · 1
7-अमरनाथ मधुर राज भाई मैं ये मानता हूँ मैंने इस आलेख में भी कहा है कि मेहनतकशों का सारा संसार है उसे देश जाति के टुकड़ों में बांटना या उनका स्वयं ऐसे किसी कटघरे में रहना सही नहीं है | जब हम कहते हैं दुनिया के मजदूरों एक हो तो पूरी मानव जाति के हित में बोल रहें होते हैं | आज भले ही यह एक हंसी ख्वाब के सिवा कुछ न हो लेकिन ये ख्वाब ही तो आदमी को इस दुनिया को हसीं बनाने का हौसला देते हैं|रही ख्वाब को हकीकत में बदलने की बात ये सपने सत्य अवश्य होंगें आज नहीं तो कल | पीड़ा की बात ये है कि जिन मेहनतकशों को ये लड़ाई लड़नी थी वो किसी और लड़ाई में अपनी ताकत जाया कर रहें हैं |
Monday at 9:22pm · Like · 1
8-मनीष कुमार यादव रेअली थिस मेक अ सीन्स ! काफी अच्छा एक्सप्लेन किया है |
येस्तेर्दय
Ranjan likes this.
9-अमर कुमार - ये बात हजम नहीं हुयी भाई .......
Monday at 10:01pm · Like
10-अलोक रंजन - जबरदस्त ..
Yesterday at 5:00am via mobile · Like
Daulat Domaji Raut NATIVE WAR WITH VIDESHI BRAHMINS NEVER STOPPED.
जवाब देंहटाएंAt no time the people who migreted to other land and country and who
marched as aggressors were large enough to surpass and claim to say that
they were aboriginals. For example Videshi British were minority, Videshi Mongal were minority. Videshi Brahmins were minority .The txture of
population as aboriginal and migrated was quite visible always.
All countries have their history of nativity and it is accepted by world
forum like UN.
In this age also countries have not opened their borders and military and
police are not abandoned by any country. Visits and citizenship is
regulated by rules like Visa, Permit of that land and entry depends on
strict conditions. To say all are Indians and nobody Native is misleading
and misconceived mischief.
It makes little sense to say that freedom struggle was unnecessary. It only shows great ignorance about liberty and Nativity.
Majority people of India are Native and Brahmins, British and Mongals were
and are foreigners in India. it is the Duty of each Native person , Mul Bhartiya, Mul Niwasi to liberate their home land from foreigners what ever
the period has passed is not important as the freedom struggle and war with foreigner Brahmins was never stopped by Native People of India.
Nv. D.D.Raut, President, Native People's Party
अमरनाथ मधुर आप बिलकुल सही कहते हैं लेकिन ये मूल निवासी क्या है ? मैंने कई से पूछा लेकिन किसी ने नहीं बताया | क्या आप बतायेंगें?
जवाब देंहटाएंabout an hour ago · Like
नरेन्द्रकुमार पासी मैंने कही पढ़ा था कि मुग़ल काल में ब्राहमणों से जजिया कर नही लिया जाता था ,बाकी सभी को देना पड़ता था ,,,लोगो ने तक दिया कि आप भी विदेशी हम भी विदेशी तो फिर ये कर कैसा
about an hour ago · Unlike · 1
नरेन्द्रकुमार पासी तक =तर्क
about an hour ago · Like
अमरनाथ मधुर - मूल निवासी कोन है ?
about an hour ago · Like
नरेन्द्रकुमार पासी वर्तमान नियमों में जो व्यक्ति ५ वर्षों कि अवधी जहाँ गुजार लेता है उसे वहाँ कि नागरिकता दे दी जाती है ,,
about an hour ago · Unlike · 1
नरेन्द्रकुमार पासी - पर जाति के मामले में एस डी एम् कोर्ट में ५० वर्षों का रिकार्ड माँगा जाता है कि फला व्यक्ति इस जगह में कब से रहता है
about an hour ago · Unlike · 1
नरेन्द्रकुमार पासी - जिनके पूर्वज यही के जन्मे हो ,किसी अन्य देश से न आए हो
about an hour ago · Unlike · 1
अमरनाथ मधुर किसके पूर्वज बाहर से नहीं आये ? क्या आदमी का जन्म इस देशमें हुआ था ?ये देश हमारा सबका है बाबा का नहीं किसी का है |
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नरेन्द्रकुमार पासी सभ्यता और संस्कृति बदलती रहती है ,कही न कही तो होता ही है ,,,जब सारी दुनिया में जनसंख्या पैदा हुई तो भारत में क्यों नही होगी
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अमरनाथ मधुर सारी दुनिया में आदमी पैदा नहीं हुआ |किसी एक जगहआदमी पैदा हुआ | अब तक की खोज के अनुसार अफ्रीका में आदमी पैदा हुआ है |वहीं से ही धीरे धीरे वो सारी धरती पर पहुंचा है, आज भी जा रहा है | पहले की तरह न देशों के ये नक़्शे थे न आब ओ हवा ऐसी थी| सब चीजें बदलती रहती हैं | देश, नक्शे ,सभ्यता ,संस्क्रती,भाषा, मानव,वातावरण,आदि | कुछ भी स्थायी नहीं है |किसी का भी मिथ्याभिमान सही नहीं है | इंसान का इंसान से हो भाईचारा यही पैगाम हमारा |
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नरेन्द्रकुमार पासी होमोसिम्पियस हमारे पूर्वज थे
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Amarnath Madhur अपनी बात स्पष्ट करें यह महत्वपूर्ण सवाल है |
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नरेन्द्रकुमार पासी जो अफ्रीका के थे ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,पर ब्राह्मणों का विकास सबसे अधिक यूरेशिया याने मध्य एशिया जो काले सागर के आस-पास के क्षेत्रो में रहते थे ,,,इसके लिए वैज्ञानिको ने डी एन ए टेस्ट किया ,,,कार्बन-१४ कि विधि से पता चल जाता है
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नरेन्द्रकुमार पासी पर आप डार्विन का जिववादी सिद्धांत पढ़िए ,,हलाकि मैंने तो नही पढ़ा ,,फिर भी अफ्रीका कि बात में भ्रम पैदा कर देगा
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अमरनाथ मधुर दक्षिणी भारत अफ्रीका महाद्वीप से जुड़ा था | काले रंग के लोग या तो दक्षिणी भारत के अफ्रीका से टूटने के साथ ही इधर रह गए या नजदीक होने के कारण भारत पहले आ गए| आर्य लोग योरोप घूमते हुए भारत पहुंचें है | बहुत दिनों तक ठन्डे प्रदेशों में रहने के कारण उनका रंग श्वेत है | बस इतनी सी बात है |किसी के पहले या बाद में आने से कम ज्यादा हक़ नहीं बनता | यूं० एस० ए० या आस्ट्रेलिया में नागरिकता मिल जाने पर पहले और बाद के आधार पर भेदभाव नहीं होता है |
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नरेन्द्रकुमार पासी हाँ पहले सारे महाद्वीप दो खंडों में बंटे थे ,,उत्तर में अन्गारालैंड और दक्षिण में गोंडवानालैंड और बीच में टेथिस एक उथला सागर था ,,शुरुआत में एक दूसरे कि और आकर्षित हुए पर बाद में बिखंडन होने लगा ,,,जो व्याख्या अपने पस्तुत कि वह लाखो वर्षों में होता है ,,,
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नरेन्द्रकुमार पासी अफ्रीका -भारत के अलग होने का समय बताएंगे
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अमरनाथ मधुर मैं विद्वान नहीं हूँ लेकिन भूगोल और इतिहास का विद्यार्थी हूँ | यह करोड़ों साल पहला है |जब प्रथ्वी का वर्तमान रूप बन रहा था |
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