मंगलवार, 22 जुलाई 2014

ईराक में ईसाई

ईराक में आई एस एस ने ईसाईयों को धमकी दी हैं कि वो या तो इस्लाम कबूल करें या जजिया दें नहीं तो उन्हें मार दिया जाएगा. आई एस एस के ये लड़ाके  क्या समझकर वहाँ के ईसाईयों पर जुल्म ढा रहे  हैं ? क्या वो पगला गए हैं जो अपनी मौत को दावत  दे  रहें हैं ? क्या उन्हें  नहीं  पता  है  कि अमेरिका  समेत पश्चिम के सारे देश उनकी इस धृष्टता को बहाना बनाकर उन्हें तहस नहस कर देंगे?  आज सारे संसार में धर्मोन्मादी जमातों का जोर बढ़ रहा है.इस्लाम,यहूदी.ईसाई, हिन्दू और यहाँ तक कि अहिंसा   के लिए जाने जाने वाले  बौद्ध धर्म के मानने वाले भी क्रूरता.कट्टरता और विधर्मियों   से बदला   लेने   की आग में जल रहे हैं .  ये प्रतिशोध भी कुछ आज का नहीं है पता नहीं किताबों में दर्ज जाने कब के झूठे सच्चे किस्सों का है. इसे देखकर यही लगता है कि   ये दुनिया किसी भयानक  गर्त की  ओर जा रही है.
         रूस की लाल क्रान्ति से सारी दुनियाँ में यह आशा जगी थी कि आदमी  को धर्म की अफीम की पिनक से मुक्ति मिलेगी लेकिन वो हशरत अधूरी रही . मजहब के नाम पर काली, हरी, सफ़ेद पताकाएँ उठाये दरिंदों के गिरोह के गिरोह अपने बिलों से निकल आये  हैं .सबका दावा है कि वो अपना धार्मिक राज्य कायम करेंगे जो सारे जहाँ में सबसे अच्छा होगा .
  भला ऐसा कोई राज्य जहाँ भिन्न विश्वाश वालों का जीवन सुरक्षित न हो सारे जहाँ से अच्छा कैसे हो सकता है ? मानवता की आशा किरण अभी भी मार्क्स का दर्शन है.लेकिन उसके झंडाबरदारों के कारनामों से वह भी अब एक सम्प्रदाय बन गया है. .जैसा कि अभी रमजान के दिनों में  समाचार आया  कि चीन सरकार ने अपने देश के मुसलमानों को रोजा रखने से मना किया है. बहुत संभव है कि ये समाचार गलत हो लेकिन अगर ये सच है तो यह एक दूसरी तरह की कट्टरता है. कोई भी नास्तिक वो भी कम्युनिष्ट किसी धार्मिक व्यक्ति को अपने धर्म के अनुसार आचरण करने से जबरन  रोके जाने से सहमत नहीं होगा. वो तर्क करेगा और जब तक सामने वाला सहमत नहीं होता है उसे धार्मिक स्वतंत्रता  की छूट  देगा. और ये छूट तब तक जारी रहेगी जब तक वह अपनी सड़ी गली मान्यताओं से मुक्ति नहीं पा लेता है. जबरदस्ती का परिवर्तन  वह चाहे धार्मिक विश्वाशों के अनुरूप हो या वैज्ञानिक निष्कर्षों के बहुत दुःखदायी होता है और बहुधा उसकी प्रतिक्रिया भी उतनी ही उग्र होती है. इसीलिए लगता है दुनिया अब प्रगति के पथ पर अग्रसर नहीं हो रही, वह प्रतिक्रिया  के दुष्चक्र में फँस रही है.          


1 टिप्पणी:

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    Mohd Shah Alam Dharm aur raajneeti ka ghaal mel......ghaatak zehar...
    22 hrs · Unlike · 1

    Govind Singh Parmar आइसिस ने मोसुल के ईसाइयो के लिए एक फरमान सुनाया है ,या तो इस्लाम कबूलो ,या जजिया दो या इलाका छोडो ,वैसे अगर इस्लाम कबूलने से संकट ख़त्म हो जाय तो ईसाइयो को ऐसा कर लेना चाहिए ,सरल उपाय है ,कल यही धमकी इजरायल भी फिलिस्तीन और अन्य पड़ोसी मुल्को को दे सकता है ,वैसे सही है ,उनका धर्म कबूल लो ,सारा झगड़ा बंद ,काहे की मारकाट ,सब समझदार कहते है ,सब धर्म एक से है ,फिर अ और ब में क्या अंतर ,बस शान्ति रहे
    21 hrs · Edited · Unlike · 2

    Aziz E Watan Hindusthan madhur ji mai apka is post ka karj kabhi bhi chuka na paunga..,....iswaqt ke lye isse acha post or ho hi nhi sakta.....dhanyabad bhai sb. ap apke kalam ko kabhi fursat mat dena....
    20 hrs · Unlike · 2

    Avinash Dangi China se kya ab v communist culture ka ummid karna sahi hai?
    7 hrs · Unlike · 1

    Siddharth Verma प्रिय गोविन्द सिंह परमार जी, विश्व में कई ऐसे देश हैं जहाँ लगभग निन्यानवे फीसदी नागरिक एक ही धर्म के अनुयायी हैं। अगर धर्म के आधार पर ही एक आदर्श राज्यतंत्र की स्थापना की अवधारणा सही है, तो उन देशों में स्वर्ग ही बन गया होता पर ऐसा नहीं है। यह ज़रूरी नहीं है कि एक ही धर्म के मानने वाले किसी आदर्श राज्यतंत्र की स्थापना कर सकते हैं।
    "चमन की रंगीनियाँ इम्तियाज़े रंगों बू से है
    हम ही हम हैं तो क्या हम हैं तुम्हीं तुम हो तो क्या तुम हो"
    6 hrs · Unlike · 4

    Shujaat Ullah Khan @siddarth verma ... bahut khoob
    5 hrs · Unlike · 2

    Govind Singh Parmar आदरणीय Siddharth Verma Sb आपसे सहमत ,मैंने तो आइसिस के फरमान के चलते सोचा शायद धर्म परिवर्तन से शान्ति आ जाय
    5 hrs · Unlike · 1

    Siddharth Verma @गोविन्द सिंह जी, उस धर्म परिवर्तन का क्या अर्थ है जो जब्र के रहते करने को इंसान मजबूर हो जाये। इसी तरह से ललालच और खुदगर्ज़ी से किया गया धर्म परिवर्तन बेकार और बेमानी है। हां, अगर कोई दिल से मुतमईन और चाहता है, तो धर्म परिवर्तन में कोई हर्ज नहीं है। कोई धर्म जबरिया धर्म परिवर्तन की इजाज़त नहीं देता।
    4 hrs · Unlike · 2

    Sajid Azad aaj ka insan janwar se bhi badtar hai...insan ko dekhkar janwar bhi sôchte honge ki ham janwar hi achhe hai..duniya pgla gai h..
    1 hr · Unlike · 1

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