शनिवार, 25 जून 2016

'सियासतदां किया करते हैं ज्यूँ कश्मीर की बातें '

कभी शमशीर सी बातें,कभी हैं शीर सी बातें
मेरे महबूब की बातें हैं जैसे पीर की बातें .

हमारे दरमियाँ भी इश्क की यूँ गुप्तगू होती
सियासतदां किया करते हैं ज्यूँ कश्मीर की बातें .

हमारे बीच भी जालिम ने एक सरहद बनायी है
इधर है आग एक दिल में, उधर तकरीर सी बातें .

हमारी हर गुजारिश अनसुनी सी हो गयी ऐसे
कि जैसे राह चलते में सुनी फ़कीर की बातें .

ज़रा सा प्यार माँगा था, कोई दौलत नहीं मांगी
कभी सूरत की बातें की, कभी तकदीर की बातें .


'मधुर ' ये दास्ताँ सुन कर करे तो क्या करे कोई 
अलिफ लैला का किस्सा है या राँझे हीर की बातें.

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