सोमवार, 24 जुलाई 2017

'भारत अटक से कटक तक एक है'


आज सुबह टी वी पर भारत के भावी उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू का कश्मीर से कन्याकुमारी और कटक से अटक तक सारा भारत एक है वाला बयान सुनकर बड़ी हैरानी हुई | वे कारगिल पराक्रम परेड कार्यक्रम में बोल रहे थे |इससे पहले प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी भी अमेरिका में भारवंशियों को संबोधित करते हुए अटक से कटक तक भारत के विकास की बात कह चुके हैं |कटक उड़ीसा में है और अटक सिंध में है | उडीसा भारत का एक प्रान्त है लेकिन सिंध भारत का हिस्सा नहीं है, सिंध पाकिस्तान में है | तब कटक से अटक तक भारत का जिक्र बार बार क्यूँ होता है ? यही नहीं वेंकैया नायडू ने ये भी कहा कि पाकिस्तान को उन्नीस सौ इकहत्तर नहीं भूलना चाहिए | मतलब अगर चीन उन्नीस सौ बासठ की याद दिलाये तो गलत है और भारत उन्नीस सौ इकहत्तर की बात करे तो सही है ? ये दूसरे की दुखती राग पर हाथ रखना और अपनी दुखती राग छेड़े जाने पर तिलमिलाना कैसे उचित है ? भारत और चीन तथा पाकिस्तान और भारत के बीच सदभाव का अभाव होने का बड़ा कारण युद्ध में पराजय की टीस भी है जिसके कारण सीमा विवाद सुलझने की बजाय उलझ जाता है या कहीं ठन्डे बसते में चला जाता है जो कभी भी सुलग उठता है |
एशिया विशेषकर भारतीय उपमहाद्वीप के देशों के बीच बहुत कुछ ऐसा साझा है जो लोगों को जोड़ता है |हमारी संस्कृति, खेल कूद,साहित्य ,कला,व्यापार और व्यवहार हमें एक करता है, लेकिन राजनीति जुड़ने नहीं देती है | राजनेताओं को अपने देश की अंदरूनी समस्याओं से जनता का ध्यान हटाने और अपनी विफलताओं को छुपाये रखने का सबसे आसान तरीका सरहदों पर आग सुलगाये रखना लगता है |उस आग में लोगों के दिल सुलगते हैं घर उजड़ते हैं लेकिन सत्ता के दलाल और मौत के सौदागर अपना कारोबार बढ़ाते रहते हैं |अब कहा जा रहा है कि भारत के पास दस दिन से ज्यादा का गोला बारूद नहीं है |और भी बहुत सा साजो सामान नहीं होगा |सरहद की हिफाजत करनी है देशभक्ति का तकाजा है खरीदो फटाफट |दुनिया भर के हथियारों के दलाल आ जायेंगे अपना कबाड़ बेचने और यहाँ देशभक्त अरबों खरबों की खरीददारी कर लेंगे | जो इस खरीददारी पर किसी भी तरह का सवाल उठाएगा उसे चीन या पाकिस्तान का एजेंट बताने में देर नहीं होगी | लाठी डंडा उठाये गमक्षाधारी इन देशद्रोहियों को कूटने को बौराए फिर ही रहे हैं |गौरक्षा के नाम पर या लॉ जेहाद के नाम पर मार कुटाई कब तक चलेगी ?ये बाकी के बचे बुद्धिजीवी किस्म के बौड़म भी तो कुटने चाहियें | यूनिवर्सिटी कालिजों में लदे पड़े ऐसे तमाम कूढ़मगजों को कई बार समझा दिया गया है कि हमारा एजेंडा दूसरी तरह की देशभक्तिवाला है उसे फालो कीजिये लेकिन ये कहाँ मानते हैं |जब जी चाहा मुंह उठाया कभी गांधी,कभी नेहरू कभी सुभाष कभी भगतसिंह की बात करने लगते हैं |जिन लोगों को ये नहीं मालूम हो कि अटक से कटक तक सारा भारत एक है उन लोगों के मुंह से भला देश हित की कोई बात हो सकती है ?इसलिए जब भारत ऊँची शाखा से जड़ तक केसरिया हो गया है तो फिर तिरंगें वाले भारत की नहीं भगवा भारत की बातें ही देशभक्ति मानी जायेंगी बाकी सब देशद्रोही हैं |इसलिए ऐसी बातें करने वाले सावधान भारत अटक से कटक तक है |

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